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🌟 धनतेरस — पर्व, मान्यताएँ और रीतियाँ

भारतवर्ष में दीपावली पर्व का आरंभ धनतेरस से होता है। यह शुभ अवसर न केवल धन और समृद्धि का प्रतीक है, बल्कि आयुर्वेद, स्वास्थ्य और आयु-दीर्घता से भी जुड़ा हुआ है। आइए जानते हैं धनतेरस का पौराणिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व विस्तार से।




🕉️ धनतेरस क्या है?

धनतेरस, जिसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है, दीपावली का पहला दिन होता है।
यह पर्व दो अलग-अलग परंपराओं के अनुसार मनाया जाता है—

अमांता परंपरा में — अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को।

पूर्णिमांत परंपरा में — कार्तिक मास की कृष्ण त्रयोदशी को।


इस दिन लोग भगवान धन्वंतरि और देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं। धन्वंतरि को आयुर्वेद के देवता और देवताओं के वैद्य के रूप में पूजा जाता है।




📜 पौराणिक कथा: समुद्र मंथन और धन्वंतरि का प्रकट होना

पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन किया, तो मंथन से सबसे पहले धन्वंतरि भगवान प्रकट हुए।
उनके एक हाथ में अमृत से भरा कलश और दूसरे हाथ में आयुर्वेद ग्रंथ था।

इसी दिन देवी लक्ष्मी भी क्षीरसागर से प्रकट हुईं। इसीलिए इस तिथि को धन (लक्ष्मी) और आरोग्य (धन्वंतरि) दोनों का प्रतीक माना जाता है।




🪔 धनतेरस की पूजा-विधि और परंपराएँ

धनतेरस के दिन घर की पूरी सफाई और शुद्धिकरण किया जाता है।
लोग अपने घरों को सजाते हैं और मुख्य द्वार पर रंगोली बनाते हैं।

प्रमुख रीतियाँ:

शाम के समय दीपदान: मिट्टी के दीपक जलाकर लक्ष्मी और धन्वंतरि की आराधना की जाती है।

धन्वंतरि पूजन: स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए धन्वंतरि भगवान की पूजा की जाती है।

लक्ष्मी पूजन: धन, वैभव और समृद्धि की देवी लक्ष्मी का स्वागत दीपों और भजनों से किया जाता है।

रंगोली व सजावट: लक्ष्मी के स्वागत के लिए चावल के आटे व सिन्दूर से उनके चरणों के निशान बनाए जाते हैं।





💰 खरीदारी का शुभ दिन

धनतेरस को संपत्ति क्रय के लिए अत्यंत शुभ दिन माना गया है।
लोग इस दिन नई वस्तुएँ खरीदते हैं, जैसे—

सोना, चाँदी या अन्य कीमती धातुएँ

नए बर्तन, गहने या आभूषण

वाहन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और गृह-सामग्री


विश्वास है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएँ सौभाग्य और समृद्धि लाती हैं।




🌾 ग्रामीण परंपरा

गाँवों में किसान अपने मवेशियों की पूजा करते हैं क्योंकि वे उनकी आजीविका का मुख्य स्रोत होते हैं। मवेशियों को सजाया जाता है और उनके स्वास्थ्य के लिए कामना की जाती है।




🌿 दक्षिण भारत की परंपरा

तमिलनाडु और दक्षिण भारत के अन्य हिस्सों में महिलाएँ इस दिन ‘मारुंडु’ नामक औषधि बनाती हैं।
यह औषधि शरीर में त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) के संतुलन के लिए मानी जाती है।
मारुंडु को नरक चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पहले प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।




🍛 गुजरात और महाराष्ट्र की विशेषताएँ

गुजरात में परिवारजन दाल-भात और मालपुआ बनाकर नए साल का आरंभ करते हैं।

महाराष्ट्र में धनतेरस पर लोग धनिये के बीजों और गुड़ का मिश्रण बनाकर देवी को अर्पित करते हैं।





🕯️ यमदीपदान की कथा (राजा हिमा के पुत्र की कहानी)

धनतेरस से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा राजा हिमा के पुत्र की है।
ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की थी कि विवाह के चौथे दिन उसे साँप के डसने से मृत्यु होगी।
उसकी पत्नी ने मृत्यु से बचाने के लिए चतुराई से उपाय किया—

उसने कमरे के द्वार पर सोने-चाँदी के सिक्कों का ढेर लगा दिया,

अनेक दीपक जलाए,

और अपने पति को रातभर जगाए रखा, गीत व कहानियाँ सुनाती रही।


रात में जब यमराज साँप का रूप धारण कर वहाँ पहुँचे, तो दीपों और आभूषणों की चमक से अंधे हो गए और अंदर प्रवेश नहीं कर पाए।
सुबह होते ही वे लौट गए — इस प्रकार राजकुमार मृत्यु से बच गया।
इसी कथा की स्मृति में आज भी “यमदीपदान” की परंपरा निभाई जाती है।




🔥 आध्यात्मिक संदेश

धनतेरस का पर्व हमें यह सिखाता है कि धन के साथ स्वास्थ्य और सद्बुद्धि का संगम ही वास्तविक समृद्धि है।
यह दिन सफाई, पवित्रता, और शुभ आरंभ का प्रतीक है।




🪔 जैन धर्म में धनतेरस

जैन समुदाय में यह दिन “धान्यतेरस” के रूप में मनाया जाता है,
जिसका अर्थ है — “तेरहवाँ शुभ दिन।”
माना जाता है कि इसी दिन भगवान महावीर ने संसारिक मोह-माया का त्याग कर मोक्ष की साधना आरंभ की थी।




🌟 निष्कर्ष

धनतेरस का पर्व धन, आरोग्य, सौभाग्य और आध्यात्मिक समृद्धि का संगम है।
यह हमें न केवल भौतिक धन, बल्कि आंतरिक शांति और स्वास्थ्य का महत्व भी याद दिलाता है।
दीपों की यह रोशनी हमारे जीवन में उजाला और शुभता का संदेश देती है।




✨ शुभ धनतेरस!
आपके जीवन में लक्ष्मी और धन्वंतरि दोनों की कृपा बनी रहे। ✨

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